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इलाज का दे झांसा थमा दिए 40 हजार रुपए का बिल.[प]

14 Feb 2019 12:40pm |

राजनांदगांव।


शहर में संचालित जय तुलसी नर्सिंग होम में स्मार्टकार्ड से इलाज के नाम पर फिर मरीजों से नकद वसूली का मामला सामने आया है। प्रसव के नाम पर भर्ती मरीज से 40 हजार रुपए ले लिया गया है। इस तरह मरीजों को अंधेरे में रखकर इलाज करने के बाद बिल थमा देने की शिकायत यहां से आए दिन मिलती है। इस बार मामले की शिकायत सीएमएचओ, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से भी की गई है। पीडि़तों ने संबंधित अस्पताल को स्मार्टकार्ड से इलाज करने की अनुमति समाप्त करने की मांग रखी है।ज्ञात हो कि उक्त अस्पताल को लेकर स्मार्टकार्ड संबंधी पहले भी शिकायत मिली थी। इसके बाद उक्त अस्पताल को तीन महीने के लिए स्मार्टकार्ड से इलाज करने के लिए सस्पेंड किया गया था। मामले की शिकायतकर्ता एकलव्य तिवारी ने बताया कि 28 जनवरी को उनकी पत्नी प्रियंवदा तिवारी (32) को प्रसव पीड़ा हुई।प्रसूता को रात 9.30 बजे तत्काल सोमनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद जच्चा-बच्चा नॉर्मल होना बताया, लेकिन उन्होंने अच्छी सुविधा प्राप्त करने के लिए प्रसुता को जिला चिकित्सालय में डिलीवरी के लिए लाया गया। यहां ड्यूटी में रही डॉक्टर सिद्धी ने ऑपरेशन की नौबत आने की बात कही और यह भी कह दिया कि यहां कोई सीनियर डाक्टर नहीं है। इस वजह से वह ऑपरेशन नहीं कर पाएंगी। ऐसा बोलते हुए रायपुर मेकाहारा या फिर निजी अस्पताल ले जाने की बात कह दी।


ऐसे लगाया जा रहा चार्ज, सुविधा कौड़ीभर नहीं : जय तुलसी नर्सिंग होम में इलाज के नाम पर प्रसूता के परिजनों को बिल दिया गया है। उसमें 10 हजार रुपए डाक्टर फीस और 12 हजार रुपए का मेडिसीन देना बताया गया है। इसके अलावा ओटी चार्ज 1000 रुपए, डाक्टर विजिटिंग चार्ज 3200, ऐनेस्थिस्टिक चार्ज 1000, नर्सिंग केयर के नाम पर 2400 वसूले। बेड चार्ज के रूप में 4800 रुपए का बिल दिया और स्वीपर चार्ज 800 रुपए लगाया गया है जबकि यह अस्पताल छोटे से बिल्डिंग में संचालित है। इसकी क्षमता 10 बिस्तर है। सुविधा के नाम पर मरीजों से बेजा वूसली की जा रही है। प्रसूताओं को अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 12 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में 100 बिस्तर मातृ-शिशु अस्पताल बनाया गया है।प्रबंधन यहां प्रसूताओं के लिए हाईटेक सुविधा होने की बात करते हैं, लेकिन रात में दर्द से कराहती हुई महिलाओं को देखते ही मिनटभर में रेफर की पर्ची थमा दी जाती है। यहां मौजूद डाक्टर इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं होने की दुहाई देकर रेफर करते हैं।बिल देने पांच दिनों तक घुमाया पीडि़तों ने बताया कि उन्हें अस्पताल में किए गए भुगतान के बिल देने के लिए करीब पांच दिनों तक घुमाया गया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल की रेफर पर्ची और सोनोग्राफी जांच की रिपोर्ट भी नहीं दी गई।मजबूरन लेकर गए नर्सिंग होम घबराए परिजनों ने रात को प्रसव पीड़ा में रायपुर लेकर जाने के बजाए प्रसूता पियंवदा तिवारी को जय तुलसी नर्सिंग होम लेकर गए। यहां स्मार्टकार्ड से इलाज हो जाने की बात कही गई। सीजर से प्रसव कराया गया। इसके बाद परिजनों को 42 हजार रुपए का बिल थमा दिया गया। परिजनों ने मजबूरन कर्ज लेकर अस्पताल प्रबंधन को भुगतान किया।अनुमति पर ही ऑपरेशन किया गयाजय तुलसी नर्सिंग होम के मैनेजर अमोलक जैन ने कहा कि उक्त महिला का केस बेहद काम्लीकेटेड था। वे महिला को रात को 1.30 बजे लेकर पहुंचे थे। केस बिगड़ा हुआ था। उन्हें पहले नकद इलाज कराने की बात कही गई। उनकी अनुमति पर ही ऑपरेशन किया गया। जब उन्हें दिक्कत थी, तो पहले शिकायत करते।



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