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आरटीई भर्ती प्रक्रिया ऑन-लाईन और मैनुवल दोनो ́ किया जाये : पॉल प्रदेश के नये मुयम ́ ̃ाी से लगाई गुहार.[प]

20 Dec 2018 04:26pm |

 




राजना ́दगा ́व।




शिक्षा का अधिकार भर्ती प्रक्रिया को ऑन-लाईन और मैनुवल दोनो ́तारीके से स ́चालित करने हेतु नये मुयम ́ ̃ाी से छत्तीसगढ ̧ पैरे ́ट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल के द्वारा आग्रह किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब बच्चो ́ को इसका लाभ मिल सके। श्री पॉल का कहना है कि इस शिक्षा स ̃ा 2018- 19 मे ́ ठीक चुनाव से पूर्व निजी स्कूलो ́ को अप्रत्यक्ष लाभ पह ́ुचाने के लिये लगभग 30 हजार गरीब बच्चो ́ को नि:शुल्क शिक्षा से व ́चित किया गया है।




इस शिक्षा स ̃ा मे ́ प्रदेश मे ́ आरटीई के अतर्गत गरीब बच्चो ́ से ऑनलाईन फार्म भरवाये गये थे, जिसके लिये उन्ह ́े 9 मई से लेकर 12 जुलाई तक का समय दिया गया था, लेकिन सीजी आरटीई वेब पोर्टल मे ́ अनेको ́ गलतिया ́ की गई थी। जिले मे ́ कई बड ̧े-बडे ̧ निजी स्कूलो ́ का नाम इस वेब पोर्टल मे ́ अपलोड नही ́ किया गया था। प्रदेश मे ́ व्यापक स्तर मे ́ इस शिक्षा स ̃ा मे  निजी स्कूलो ́ को जान-बुझकर लाभ पह  ́ुचाया गया है, इसकी अनेको ́ लि१ित शिकायत किया गया, लेकिन किसी भी दोषी व्यक्ति पर कोई कार्यवाही नही ́ किया गया। 



बाक्स.....आधे से कम सीट्स पर दिया गया प्रवेश प्रदेश मे ́ 6 हजार निजी स्कूलो ́ मे ́ 80 हजार सीट्स गरीब बच्चो ́ के लिये आरक्षित किये गये थे, जिसके लिये लगभग 77 हजार गरीब बच्चो ́ ने ऑन-लाईन फार्म भरा था। ऑनलाईन फार्म भरवाये गये, लेकिन मैनुवल तारीके से लॉटरी निकाला गया जिसके बड ̧े स्तर मे ́
मनमानी किया गया और सिर्फ 35 हजार गरीब बच्चो ́ को प्रवेश दिया गया और लगभग 30 हजार
पा ̃ा गरीब बच्चो ́ को नि:शुल्क शिक्षा से व ́चित कर दिया गया।




छत्तीसगढ ̧ मे ́ जान-बुझकर शिक्षा का अधिकार कानून को गलत ढ ́ग सेन परिभाषित और प्रचारित किया जा रहा है, ताकि कम से कम सीट्स पर निजी स्कूलो ́ मे ́ गरीब बच्चो ́ को प्रवेश दिया जा सके। बाक्स.......क्या कहता है कानून शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 12 (ग) मेे ́ यह स्पष्ट रूप से उल्ले१ित है कि ऐसे प्रायवेट स्कूल, जिन्हे ́ सरकार या स्थानीय प्राधिकारी से सहायता प्राप्त नही ́ है, कक्षा-1 मे ́ कुल बच्चो ́ की स ́या (नया दा१िला) के आधार पर कम से कम 25 प्रतिशत ऐसे बच्चो ́ को प्रवेश दे ́गे जो कमजोर या व ́चित समूह से है।




यदि प्रायवेट स्कूल मे ́ पूर्व- स्कूल (नर्सरी से लेकर केजी-2) शिक्षा भी उपलब्ध है तो उसमे ́ भी कम से कम 25 प्रतिशत ऐसे बच्चो ́को प्रवेश दे ́गे जो कमजोर या व ́चित समूह से है।


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