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बेटियां गढ़ेंगी अबुझमाड़ का भविष्य बाल मेले में मेधावी विद्यार्थियों के प्रश्नों पर बोले मुख्ममंत्री [स]

14 Nov 2017 07:14pm |
दुर्ग।
           मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज बाल दिवस के अवसर पर दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम में आयोजित बाल मेले में मेधावी स्कूली बच्चों से संवाद किया। और उनकी जिज्ञासाओं तथा प्रश्नों का उत्तर दिया। मुख्यमंत्री ने इस बाल मेले में विशेष पिछड़ी जनजाति की मेधावी छात्राओं, प्रयास विद्यालयों में अध्ययनरत् और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ छात्रावासों में रहकर अपनी पढ़ाई करने वाले मेधावी विद्यार्थियों से चर्चा-परिचर्चा की।

           इस परिचर्चा के दौरान अबुझमाड़ के काना गांव की बेटी कुमारी शाकुंतला धु्रव ने मुख्यमंत्री से पूछा की अबुझमाड़ी बच्चों को शिक्षक बनाने का विचार उन्हें कैसे आया। इस पर मुख्यमंत्री डाॅ. सिंह ने जवाब दिया कि अबुझमाड़ ने शिक्षा की स्थिति पहले बहुत खराब थी। क्षेत्र में स्कूल नहीं थे जिससे पढ़ने की चाह रखने वाले छात्र-छात्राएं भी अपनी पढ़ाई नहीं कर पाते थे, धुर नक्सल प्रभावित और वनाचंल क्षेत्र होने के कारण अच्छे शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पाते थे।

           मुख्यमंत्री ने बताया कि नारायणपुर प्रवास के दौरान उन्हें जिले में शिक्षा की स्थिति का पता चला और अबुझमाड़ क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाने तथा उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए स्थानीय युवाओं को ही शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित कर तैयार करने का विचार आया। डॉ. सिंह ने बताया कि अबुझमाड़ से मेधावी बच्चों को चिन्हांकित कर उन्हें दुर्ग के आर्यभट्ट विज्ञान विकास केन्द्र में लाकर शिक्षक बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

           अब अबुझमाड़ की बेटियां ही अबुझमाड़ के बच्चों को पढ़ा कर अबुझमाड़ की दिशा और दशा बदलेंगी। दुर्ग के विज्ञान विकास केन्द्र में पढ़कर शिक्षक बनकर जिस आत्मविश्वास से अबुझमाड़ की बेटी ने मुख्यमंत्री से संवाद किया, उस पर स्वयं डॉ. रमन सिंह भी अचंभित रह गए और उन्होंने कुमारी शांकुतला ध्रुव की तारीफ करते हुए कहा कि अब अबुझमाड़ अवश्य बदलेगा। अबुझमाड़ में अब अवश्य ही विकास होगा और खुशहाली आएगी। 

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