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ओखी तूफान से इन सीटों पर बढ़ गए वोटर्स, बदल सकता है चुनावी समीकरण[]  

07 Dec 2017 06:44pm |

ओखी तूफान का असर गुजरात विधानसभा चुनाव में वोटरों का समीकरण बदल सकता है. ऐसा इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि,ओखी तूफ़ान के कारण हजारों की तादाद में मछुआरे वोटिंग के दौरान मछली पकड़ने नहीं जाएंगे. इससे दक्षिण गुजरात में 9 तारीख को होने वाले मतदान में मछुआरे वोटर्स का सीधा असर वोट प्रतिशत के अलावा चुनाव परिणाम पर भी दिखाई देगा.

देखा गया है कि पिछले कुछ चुनावों के दौरान हजारों की तादाद में मछुआरे वोटिंग के दिन मछली पकड़ने निकल जाते हैं, इससे वोटिंग का प्रतिशत दक्षिण गुजरात के तटीय इलाकों में कम होता है.यदि चुनावी आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो दक्षिण गुजरात की वलसाड सीट पर सबसे ज्यादा माछी समाज के वोटर्स हैं. बता दें कि माछी समुदाय के लोग मछली पकड़ने के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं.


ये समाज हर चुनाव में किसी भी प्रत्याशी की जीत हार में बड़ा रोल निभाते हैं. हर बार तो हजारों मछुआरे चुनाव के दौरान मछली पकड़ने निकल जाते हैं, लेकिन इस बार ओखी तूफ़ान के कारण मछुआरे अपने घरों में है.  


माछी समुदाय के नेताओं का मानना है कि ओखी तूफ़ान के कारण इस बार माछी वोट चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. क्योंकि सूरत शहर की पश्चिम और पूर्व सीट पर इस समाज के वोटर्स का असर तो है ही साथ ही दक्षिण गुजरात की 12 और पूरे गुजरात में लगभग 22 सीटों पर भी माछी समाज के वोट हैं.

जानिए कहां हो सकता है सबसे ज्यादा असर...


माछी समाज के वोटर्स का सबसे ज्यादा असर यदि कहीं दिखाई देगा तो वो है वलसाड और जलालपुर सीट. वलसाड की सीट पर 34 हजार से ज्यादा माछी वोटर्स हैं. वहीं, जलालपुर की बात की जाए तो यहां 22 हजार माछी वोटर्स हैं. कांग्रेस और बीजेपी माछी समुदाय के वोट पाने के लिए जोर आजमाइश में लगे हुए हैं. राहुल गांधी भी कुछ दिन पहले इन इलाकों का दौरा कर चुके हैं.  



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