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  नई दिल्ली: 2 हफ्तों तक नहीं मिलेगा ATM से कैश,  RBI के पास नहीं पर्याप्त नकदी

19 Apr 2018 01:51pm |

  नई दिल्ली: 

देश के कुछ हिस्सों में कैश की किल्लत के बीच सरकार और रिजर्व बैंक ने दावा किया है कि देश में कैश की कमी नहीं है. एटीएम में नोट न होने की समस्या अस्थायी और तकनीकी कारणों से है. लेकिन एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में जितना कैश का फ्लो होना चाहिए, उसमें 70,000 करोड़ रुपए की अब भी कमी है. ऐसे में नकदी संकट से जूझ रहे देश के कई हिस्सों को राहत कम से कम दो हफ्तों में मिल सकेगी. हो सकता है कि पूरी राहत मिलने में छह सप्ताह तक लग जाएं.

 

आरबीआई के पास नहीं है पैसा
इकोनॉमिस्ट का मानना है कि डिमांड पूरी करने के लिए अतिरिक्त 70 हजार करोड़ से लेकर एक लाख करोड़ रुपए तक के नोट छापने में वक्त लगेगा. आरबीआई भले ही दावा करे लेकिन, खुद आरबीआई के पास बैंकों को देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. इसलिए छपाई में इतना वक्त लग सकता है. जानकारों का कहना है कि देश में लोगों के पास और एटीएम में कुल कम से कम 19.4 से 20 लाख करोड़ रुपए की करंसी होने चाहिए. अभी लोगों के पास 17.5 लाख करोड़ रुपए हैं, जबकि अनुमान है कि इसके अलावा 1.2 लाख करोड़ रुपए का इस्तेमाल डिजिटल ट्रांजैक्शंस में होगा.

 

70000 करोड़ रुपए की कमी
ऐक्सिस बैंक के चीफ इकनॉमिस्ट सौगत भट्टाचार्य के मुताबिक, नवंबर 2016 में लगे झटके का असर अभी पूरी रह खत्म नहीं हुआ है. एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2018 में 10.8 पर्सेंट नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के आधार पर मार्च तक लोगों के पास 19.4 लाख करोड़ रुपए की करंसी होनी चाहिए थी, लेकिन असल में करंसी 1.9 लाख करोड़ रुपए कम थी. हालांकि, डिजिटल तरीकों से कम से कम 1.2 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हो सकता है. लेकिन, फिर भी करीब 70000 करोड़ रुपए की कमी हो सकती है.

तेलंगाना से हुई थी शुरुआत
कैश क्रंच की स्थिति सबसे पहले अप्रैल की शुरुआत में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में शुरू हुई थी और जल्द ही यह देश के दूसरे इलाकों तक पहुंच गई. बुधवार को स्थिति में कुछ सुधार होता दिखा और कई एटीएम से लोगों को फिर पैसा मिलने लगा. 

 

सरकार ने बढ़ाई 500 के नोट की छपाई
सरकार ने कहा है कि वह 500 रुपए के नोटों की प्रिंटिंग पांच गुना बढ़ाएगी. भारत में चार सिक्यॉरिटी प्रिंटिंग प्रेस हैं. मैसूर और सालबनी के प्रेस आरबीआई के पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड चलाती है. इन दोनों में 500 रुपए के नोट छापे जाते हैं. अगर दोनों शिफ्ट्स में काम हो तो ये दोनों प्रेस हर साल बैंक नोट के 1600 करोड़ पीस छाप सकते हैं. 

 

छपाई में लगेंगे दो हफ्ते
70 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित कमी है. अगर यह मान लें कि यह पूरा अंतर केवल 500 रुपए के नोटों की छपाई से घटाया जाएगा तो देश को लगभग 140 करोड़ अतिरिक्त बैंक नोटों की जरूरत होगी. ऐसे में मैसूर और सालबनी के छापाखानों को इन्हें छापने में कम से कम दो हफ्ते लगेंगे.

 
 

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