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भारतीय मूल की सुशीला जयपाल ओरेगॉन पहली दक्षिण एशियाई महिला[प]

16 May 2018 12:50pm |

 

भारतीय मूल की एक और महिला ने अमेरिकी राजनीति में दमदार एंट्री की है। अमेरिकन कांग्रेस की लीडर प्रमिला जयपाल की बहन सुशीला जयपाल ने अमेरिका के ओरेगॉन प्रांत के मल्टीनोमा काउंटी बोर्ड ऑफ कमिश्नर में सदस्य के रूप में जीत हासिल की है। इसके साथ ही वह ऐसी पहली दक्षिण एशियाई महिला लीडर भी बन गई हैं, जिसने इस पद पर जीत हासिल की है। 

पूर्व में कॉरपोरेट वकील और लंबे समय से सामुदायिक स्वयंसेवक सुशीला जयपाल ने कॉन्ट्रैक्टर शेरॉन मैक्सवेल के अलावा दो और लोगों को हरा कर ये जीत हासिल की है। सुशीला अभी राजनीति में काफी नई हैं। वो उत्तर और उत्तरी पूर्व पोर्टलैंड के कमिश्नर के तौर पर प्रतिनिधि होंगी। 

जीत के बाद बहन ने दी ट्वीट कर बधाई

सुशीला की बहन प्रमिला ने जीत के तुरंत बाद ट्वीट किया और इस बात की जानकारी दी। प्रमिला ने लिखा, "मेरी बहन", सुशीला जयपाल,"ओरेगॉन में चुनी गईं पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी बनीं! "प्रमिला, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुनी गईं पहली भारतीय अमेरिकी महिला हैं।

भारत में जन्म, अमेरिका में शिक्षा

अपनी बहन प्रमिला की तरह सुशीला का जन्म भी भारत में ही हुआ था। जब वह 16 साल की थीं तो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं। साल 1983 में जब सुशीला ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उस वक्त सुशीला की उम्र 20 साल थी। इसके बाद दो साल तक सुशीला ने एक आर्थिक विश्लेषक के तौर पर इनवेस्टमेंट बैंक में काम किया। बाद में सुशीला लॉ की डिग्री के लिए शिकागो यूनिवर्सिटी चली गईं। इसके बाद सुशीला ने सैन फ्रांसिस्को और पोर्टलैंड में कुछ तक वकील के तौर पर काम किया। बाद में सुशीला एडिडास कंपनी की प्रमुख वकील बनीं। 

लोगों की मुफ्त में मदद

बाद में सुशीला ने अमेरिका में राजनीतिक शरण की तलाश कर रहे लोगों को मुफ्त में कानूनी सेवाएं दी। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित फैक्टरीज़ में काम कर रहे मजूदरों की दशा सुधारने पर भी काम किया। 

भारत से विशेष लगाव

सुशीला भले ही अमेरिका में रच बस गई हों लेकिन उनका भारत से मोह कम नहीं हुआ है। वह समय-समय पर अपने माता-पिता से मिलने भारत आती रहती हैं। 

बेघर लोगों को छत देना पहली प्राथमिकता

सुशीला ने जीत के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता बेघर लोगों को छत देने की है। इसके अलावा वह एक लोकपाल कार्यालय भी खोलना चाहती हैं। सुशीला कहती हैं कि विस्थापिन के शिकार लोगों की मदद करना चाहती हैं। 

 

 


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