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शहर को प्रदूषण मुक्त करने की तैयारी[प]

16 May 2018 01:07pm |

 

शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 15 वर्ष पुराने व्यावसायिक वाहनों पर रोक लगाई जा सकती है। वहीं सीएनजी व एलपीजी से चलने वाले वाहनों को स्वीकृति दी जा सकती है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के निर्देश पर पटना के आधार पर इसकी कार्ययोजना तैयार की गई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पटना शहर की कार्ययोजना डीएम मो. सोहैल को भेजी है। संबंधित विभाग या एजेंसी से सुझाव व मंतव्य लेकर उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। इसे अंतिम रूप से स्वीकृति के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

मालूम हो कि मुजफ्फरपुर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। हाल में जारी सर्वे में यह नौवें स्थान पर है। इसे देखते हुए यह कार्ययोजना बन रही।

इस तरह बनी है कार्ययोजना

वाहनों को लेकर कार्ययोजना

- 15 वर्ष से पुराने व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर रोक

- सीएनजी व एलपीजी को वाहनों के इ्र्रधन के रूप में इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा

- वाहनों में पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) प्रमाण-पत्रों की नियमित जांच होगी

- ट्रैफिक का बेहतर प्रबंधन। ताकि, जाम नहीं लगे

- डीजल से चलने वाले ऑटो के निबंधन व परिचालन पर पूरी तरह रोक, ई-रिक्शा को बढ़ावा।

- मल्टी लेयर पार्किंग की सुविधा।

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग होंगे बंद

कार्ययोजना के अनुसार प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद कर दिया जाएगा। वहीं उद्योगों के लिए प्रदूषण नियंत्रण यंत्र लगाना अनिवार्य होगा। ईट उद्योग में भी सफाई तकनीक का इस्तेमाल होगा।

खुले में कचरा जलाने पर रोक

निगम द्वारा खुले में ठोस, प्लास्टिक, बायोमास आदि का कचरा जलाए जाने को लेकर सख्ती होगी। इसके अलावा कचरा प्रबंधन का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा।

सड़कों की सफाई पर भी रहेगा ध्यान

- सड़कों की नियमित रूप से सफाई। टैंकों से सड़कों पर पानी का छिड़काव

- सड़क किनारे पौधरोपण। हरित क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। पार्क, सार्वजनिक स्थान, स्कूल, हाउसिंग कॉलोनी आदि में पौधे लगाए जाएंगे। प्रमुख ट्रैफिक गोलंबर पर वाटर फाउंटेन लगेंगे।

स्टोन चिप्स व अन्य निर्माण

सामग्री को कवर करना जरूरी

प्रदूषण फैलाने में निर्माण सामग्री भी कारक है। इसे देखते हुए स्टोन चिप्स, बालू, मिट्टी आदि की ढुलाई के समय वाहन को ढंकना जरुरी होगा।सड़क किनारे इन सामग्री को नहीं रखा जाएगा। निर्माण कार्य को भी कवर करना होगा।

- इसके अलावा लोगों को भी जागरूक किया जाएगा। स्कूलों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही हेल्प लाइन भी बनेंगे।

 


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