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शिमलाःकांग्रेस 'राज' में अफसर चलाते थे सरकार[]

11 Jun 2018 11:53am |

शिमलाः

पूर्व कांग्रेस 'राज' में अफसर ही सरकार चलाते थे। लोक निर्माण विभाग में तो कई अफसर बेलगाम हो गए थे। इसका खुलासा कोर्ट के निर्देश पर हुई प्रारंभिक जांच में हुआ है। इससे पता चला है कि करीब 35 मंडलों में अधिकारियों ने टेंडर आवंटन में अनियमितताएं बरतीं। इन मंडलों में बड़े ठेकेदारों पर मेहरबानी दिखाई और छोटे ठेकेदारों को दरकिनार किया गया। 2015 में बने सरकार के नियमों को ठेंगा दिखाया गया। सात मंडलों में तो गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।

इसी के आधार सात एक्सईएन को चार्जशीट किया गया है। अब औपचारिक विभागीय जांच में कई और मंडलों के अधिकारी फंस सकते हैं। अगर जांच में दोषी पाए गए तो फिर नौकरी से बर्खास्त हो सकते हैं। चार्जशीट की नौबत न आती अगर सोलन के एक ठेकेदार कोर्ट का दरवाजा न खटखटाते। उन्होंने इस मामले को सुप्रीमकोर्ट तक पहुंचाया। यह सी क्लास का ठेकेदार है। उसे सी क्लास का ठेका नहीं दिया गया, जबकि कई मंडलों में ऐसा किया गया।  

किसे क्या आवंटन किया पूर्व सरकार ने 2015 में एनलिस्टमेंट रूल्स बदले। पहले सीपीडब्ल्यूडी कोड, पंजाब पीडब्ल्यूडी मैन्युल कोड लागू था। इसमें डी क्लास के ठेकेदारों को राहत देने की बात कही गई, लेकिन अधिकारियों ने मनमाफिक तरीके से ए और बी क्लास के ठेकेदारों को डी क्लास तक के ठेके दे दिए। इससे डी क्लास के ठेकेदार ठेके लेने से वंचित रहे।  

 

कितने ठेकेदार हैं हिमाचल में डी यानी सबसे छोटी श्रेणी के करीब 50 हजार ठेकेदार हैं। विभाग में ए से लेकर डी क्लास के ठेकेदारों का पंजीकरण होता है। ए और बी क्लास के ठेकेदारों को सड़कों, पुलों, भवन निर्माण के बड़े कार्य आवंटित होते हैं। इनकी हर सरकार तक पहुंच होती है।

कितने का कार्य करने की पावर डी क्लास के ठेकेदार 10 लाख तक, सी क्लास के ठेकेदार 25 लाख तक, बी क्लास के ठेकेदार एक करोड़ तक और ए क्लास के ठेकेदार एक करोड़ से अधिक के कार्य कर सकते हैं। इसके आवंटन में सरकार समय समय पर संशोधन करती रहती है।

हाइकोर्ट के निर्देश पर कई अफसरों को चार्जशीट किया गया है। कंडाघाट का एक ठेकेदार तो सुप्रीमकोर्ट तक पहुंच गया था। हरेक मंडलों के रिकॉर्ड की छंटनी की गई थी। अब सरकार के निर्देश पर अगली औपचारिक विभागीय जांच होगी।


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