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भारत को भी झेलने होंगे 'ट्रेड वार' के तीर, कारोबार को लेकर वैश्विक स्तर पर छिड़ी जंग{य}

17 Jun 2018 06:41pm |

नई दिल्लीः

वैश्विक कारोबारी मंच पर ट्रेड वार को लेकर जो आशंका थी वह सच साबित होने लगी है। ट्रंप प्रशासन ने मैक्सिको से होने वाले आयात पर टैक्स लगाने का जो सिलसिला शुरु किया था उसके लपेटे में चीन और भारत भी आ चुके हैं। इसके जवाब में पहले चीन ने और अब भारत ने भी अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के खिलाफ कदम उठाने शुरु कर दिये हैं। जानकारों की मानें तो दुनिया के बड़े देशों में कारोबारी हितों को लेकर रस्सा-कस्सी तेज होती है तो यह सभी के लिए बुरी खबर होगी। भारत पर ब्याज दरों से लेकर शेयर बाजार तक पर इसका प्रत्यक्ष या परोक्ष असर पड़ना तय है।

कहां-कहां होगा असर

1. अमेरिका में ब्याज दरों के और बढ़ने के आसार : भारत से भाग सकते हैं संस्थागत निवेशक

2. यूरोपीय संघ भी उठा सकता है संरक्षणवादी कदम : भारतीय निर्यात पर पड़ेगा असर

3. अंतरराष्ट्रीय बांड्स बाजार पर भी होगा उल्टा असर : प्रभावित होगी भारतीय बैंकों की कमाई

शेयर बाजार में संभव है उथल पुथल : अमेरिका की तरफ से चीन से 50 अरब डॉलर के आयात पर ज्यादा शुल्क लगाने और उसके जवाब में चीन की तरफ से अमेरिकी आटोमोबाइल, क्रूड व कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का ऐलान किया गया है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी।


अमेरिका का केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व बैंक) पहले ही ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला शुरु किये हुए है। इसमें और तेज बढ़ोतरी हो सकती है। जनवरी, 2018 के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से 24 करोड़ डॉलर की राशि बाहर निकाल चुके हैं। यह सिलसिला और तेज हो सकता है क्योंकि अमेरिका में संस्थागत निवेशकों को ज्यादा बेहतर रिटर्न मिलेगा। इससे भारतीय शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल देखा जा सकता है। शेयर बाजार के साथ ही देश के बांड्स बाजार से भी विदेशी संस्थागत निवेशक अपना निवेश खींच सकते हैं जो सीधे तौर पर भारतीय बैंकों की कमाई पर असर डालेगा।

 

थम सकती है विकास दर की रफ्तार

पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक की रिपोर्ट के अलावा हाल ही में आरबीआइ की मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा गया है कि 'ट्रेड वार' गहराने से दुनिया की आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है। अप्रैल, 2018 में वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए आरबीआइ ने क्रूड की कीमत व ट्रेड वार को दो सबसे बड़ी चुनौतियों के तौर पर चिन्हित किया था। पिछले हफ्ते आइएमएफ की एमडी क्रिस्टीना लेगार्डे ने कहा है कि अगर अमेरिका की तरफ से और देशों के आयात को रोकने की कोशिश की जाती है तो यह पूरी दुनिया की आर्थिक विकास दर को पीछे की तरफ से खींचने वाला होगा।

 

ताजी खबर यह है कि जर्मनी ने इस वर्ष की अपनी विकास दर के अनुमान को घटा कर दो फीसद कर दिया है। यूरोप के अन्य देश भी ऐसा करने की सोच रहे हैं। केअर रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक ट्रेड वार से कई देशों की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर होगा जो भारतीय निर्यात के लिए एक बुरी खबर है।


भारत के स्टील व अल्यूमिनियम आयात को हतोत्साहित करने का अमेरिकी सरकार के फैसले का असर अगले महीने के आयात-निर्यात आंकड़ों पर दिख सकता है। कुछ हफ्ते पहले उद्योग चैंबर एसोचैम ने वैश्विक ट्रेड वार को भारतीय निर्यातकों के लिए एक बुरी खबर बताते हुए कहा था कि परोक्ष तौर पर इसका असर चालू व्यापार घाटे (विदेशी मुद्रा के देश में आने व देश से बाहर जाने के अंतर) पर भी पड़ेगा।

 

 

 


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