News Flash: आदर्श आचार संहिता का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।  ||   बिलासपुर: 13 दिसंबर को होगी नान घोटाला मामले की अगली सुनवाई      ||   बिलासपुर: 13 दिसंबर को होगी नान घोटाला मामले की अगली सुनवाई      ||   धमतरीः कांग्रेस ने 16 लोगों को किया पार्टी से बाहर  ||   छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावः 10 सीटों पर वोटिंग खत्म, 3 बजे तक कुल 41.18 % प्रतिशत मतदान   ||      रायपुरः अमित शाह का शिवरीनारायण में पामगढ़ प्रत्याशी अम्बेश जांगड़े जी के पक्ष में धुंआधार प्रचार     ||   छ.ग.वि.चु.: बस्तर संभाग और राजनांदगांव मे पहले चरण की 10 सीटों पर मतदान बंद    ||   छ.ग. वि.चु. : जगदलपुर मे पहले चरण की 10 सीटों पर मतदान बंद    ||   छत्तीसगढ़ में आज पहले चरण के लिए वोटिंग जारी, 18 सीटों के लिए 192 प्रत्याशी मैदान में   ||   छ.ग. विधानसभा चुनावः चुनाव के दिन भी नक्सलियों का आतंक जारी, दंतेवाड़ा में किया IED ब्लास्ट  ||  

नई दिल्लीःदिल्ली में कूड़े का पहाड़ और मुंबई डूब रही पर सरकार कुछ नहीं कर रही[]

11 Jul 2018 09:04am |

नई दिल्लीः

सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकारों के उदासीन रवैये पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार को बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा, दिल्ली में कूड़े का पहाड़ है और मुंबई डूब रही है, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही। कोर्ट ने कचरा प्रबंधन के बारे में हलफनामा दाखिल कर योजना का ब्योरा न देने वाले दस राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों पर जुर्माना भी ठोका है।

 

इतना ही नहीं कोर्ट ने दिल्ली के प्रति ज्यादा ही सख्त और व्यंगात्मक टिप्पणी करते हुए पूछा है कि हलफनामा दाखिल कर बताओ कि दिल्ली में कूड़े का पहाड़ हटाना किसकी जिम्मेदारी में आता है? ये उपराज्यपाल के कार्यक्षेत्र में आता है या दिल्ली सरकार के। कोर्ट ने दिल्ली से इस बाबत कल (बुधवार) तक हलफनामा मांगा है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर व न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राज्यों के कचरा प्रबंधन मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि जब कोर्ट दखल देता है तो उस पर न्यायिक सक्रियता के आरोप लगते हैं, लेकिन कोर्ट क्या करे जब सरकार कुछ कर नहीं करती या गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाती है।

 

कोर्ट ने दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के अधिकार स्पष्ट करने वाले हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बताओ दिल्ली में जो तीन भलस्वा, ओखला और गाजीपुर में कूड़े के पहाड़ हैं, उन्हें हटाने की जिम्मेदारी किसकी है? दिल्ली सरकार की है या उप राज्यपाल की है? कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कूड़े के पहाड़ के नीचे दबती जा रही है और मुंबई भारी बारिश से डूब रही है, लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही। दिल्ली में कूड़े के ढेर के कारण लोग डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से संक्रमित हो रहे हैं। पीठ का कहना था कि जब कोर्ट दखल देता है तो उसे शक्ति के बंटवारे के सिद्धांत का लेक्चर दिया जाता है। उससे कहा जाता है कि वह क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण कर रहा है।


इन राज्यों पर लगा जुर्माना
कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर कचरा प्रबंधन नीति का ब्योरा न देने वाले राज्यों पर एक एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक, मेघालय, पंजाब, लक्ष्यद्वीप और पुडुचेरी पर हलफनामा न दाखिल करने पर लगाया गया है। कोर्ट ने हलफनामा दाखिल न करने वाले और उनकी ओर से कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील के भी पेश न होने वाले राज्यों पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि वे इन राज्यों को हलफनामा दाखिल करने का अंतिम मौका देते हैं और अगर ये फिर भी हलफनामा दाखिल कर नहीं बताते कि देश में लागू कानून इनके यहां क्यों नहीं लागू है तो इनके मुख्य सचिवों को कोर्ट मे तलब किया जाएगा।

 

कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की रकम दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी में जमा कराई जाएगी और उसका उपयोग किशोर न्याय के मुद्दों पर किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ये बहुत दुखद है कि दो तिहाई राज्य न तो कोर्ट के पारित आदेशों की चिंता करते हैं और न ही पर्यावरण मंत्रालय के जारी निर्देशों का पालन करते हैं। देश में कचरा प्रबंधन की गंभीर समस्या को देखते हुए ये स्थिति दुखद ही नहीं बल्कि चौकाने वाली भी है।


पीठ ने कहा कि जब सरकारें संसद से पास कानून का पालन नहीं करतीं तो फिर वे नियमों का पालन क्या करेंगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी से कहा कि जब सरकारें कुछ न करें और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार करें तो क्या होगा। किसे जिम्मेदार माना जाए। यहां तक कि वे कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं करतीं। एएसजी ने कहा कि संविधान के मुताबिक राज्यों को सर्वोच्च अदालत के आदेशों का पालन करना चाहिए और ऐसा नहीं करने पर अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।


पीठ ने कहा कि कचरा प्रबंधन के नियम 2016 में आए थे। दो साल बीत चुके हैं, लेकिन दो तिहाई राज्यों ने अभी तक इन्हें लागू नहीं किया है। कुछ राज्यो ने हलफनामा दाखिल कर ब्योरा दिया है जबकि कुछ ने आज ही हलफनामा दाखिल करने का कोर्ट को भरोसा दिलाया। कोर्ट इस मामले में 7 अगस्त को फिर सुनवाई करेगा। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली के मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार के वकील से कल तक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने दिल्ली के मामले को 12 जुलाई को फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है।

 

 

ताजा समाचार



  • Follow us: