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नई दिल्लीः8 देशों के 90 गोताखोरों ने 18 दिन में एेसे बचाई 13 लोगों की जिंदगी[]

11 Jul 2018 09:08am |
नई दिल्लीः

उत्तरी थाइलैंड की थाम लुआंग गुफा में दो सप्ताह से अधिक समय से फुटबॉल कोच के साथ फंसे 12 बच्चों को रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया। बाढ़ग्रस्त गुफा में फंसे बच्चों को निकालने के लिए 50 विदेशी गोताखोरों और थाइलैंड की नेवी सील के 40 जवानों का साहसिक अभियान सफल रहा।

 

बचाए गए सभी बच्चों को हेलीकॉप्टर से नजदीकी शहर चियांग राई ले जाया गया। वहां स्वास्थ्य जांच के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी बच्चे स्वस्थ हैं। केव मेज बॉटलनेक नामक बचाव अभियान के प्रमुख नारोंगसाक असोतानाकोर्न ने बताया कि अंधेरा और तेज बारिश फिर शुरू हो जाने से रात में ऑपरेशन 10 घंटे के लिए रोक दिया गया था।

 

बचाव दल के एक सदस्य ने बताया कि बच्चे 11 से 16 साल की उम्र के हैं और तैराकी में निपुण नहीं थे। इसलिए उन्हें बाहर निकालने में बहुत सावधानी बरती गई। वैसे यह बचाव अभियान उम्मीद से कहीं अच्छे तरीके से चला। गोताखोर तो इतने खुश थे कि बच्चों को बाहर लाते ही गले से लगा लिया। सबसे पहले सर्वाधिक स्वस्थ बच्चों को निकाला गया।

अस्थायी बेस कैंप

गुफा में बच्चों के लिए अस्थायी बेस कैंप बना दिया गया था। इसकी लोकेशन पटाया बीच के करीब था। वहां ऑक्सीजन लाइन भी बिछा दी गई थी, ताकि बच्चे सांस ले सकें। दरअसल, गुफा पहाड़ों के नीचे है। कहीं रास्ता ऊपर जाता है और कहीं कुछ नीचे। निचले हिस्सों में पानी भरा हुआ था। बारिश में हमेशा इन गुफाओं में पानी भर जाता है।

 

बचाव में आठ देशों के विशेषज्ञ

बचाव अभियान में आठ देशों के विशेषज्ञ लगे हुए थे। इनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, यूरोप और एशिया के गोताखोर शामिल थे। गोताखोरों को गुफा का एक चक्कर पूरा करने में करीब 11 घंटे का समय लगा। इस घटना ने समूचे थाइलैंड और दुनियाभर का ध्यान अपनी तरफ खींचा।

 

बाढ़ का पानी पीकर जिंदा रहे

शुरुआती नौ दिनों तक बच्चों ने खाना नहीं खाया, सिर्फ बाढ़ के पानी के सहारे ही जिंदा थे। बाद में उन तक खाने-पीने का कुछ सामान पहुंचाया गया। बच्चों को यह तक नहीं पता था कि वे कितने दिन से फंसे हुए हैं।

 

ऐसे चल रहा बचाव अभियान

90 गोताखोर जुटे हैं पूरे ऑपरेशन में- 40 थाई जबकि 50 अन्य देशों के गोताखोर- 01 बच्चे को बाहर निकालने के लिए लगाए गए 02 गोताखोर

 

गुफा में ऐसे पहुंचे बच्चे

23 जून को वाइल्ड बोर्स नाम की टीम ने फुटबॉल मैच खेला। मैच के बाद बच्चे साइकिल रेस लगाते हुए गुफा तक जा पहुंचे।

 बच्चे गुफा के अंदर चले गए। उनके साथ उनका कोच भी था। देखते-देखते इतनी बारिश हुई कि गुफा में बाढ़ आ गई।

बाहर निकलने का एक ही रास्ता था और वह पूरी तरह बंद हो चुका था। रात तक जब बच्चे घर नहीं लौटे तो घरवाले परेशान हो गए।

खबर मिलने पर प्रशासन बच्चों की खोज में लग गया। थाइलैंड की नेवी सील को भी इस ऑपरेशन में लगा दिया गया। 

 

अभूतपूर्व है थाई बच्चों का साहस
थाइलैंड की थाम लुआंग गुफा से बच्चों को बचाने वाली टीम में शामिल गोताखोर इवान कराडजिक ने सभी बच्चों के अद्भुत साहस की सराहना की है। उन्होंने गुफा से सुरक्षित बाहर आने की बच्चों की यात्रा को अभूतपूर्व बताया। थाइलैंड में गोताखोरी के व्यवसाय से जुड़े इवान ने कहा कि उन बच्चों को ऐसा काम करने को कहा गया जो आज तक किसी बच्चे ने नहीं किया होगा। 11 साल में किसी गुफा को तैरकर पार करना सामान्य बात नहीं है। वह ऐसे खतरनाक वातावरण में गोता लगा रहे थे जहां सिर्फ अंधेरा था।

 

रोशनी का एक मात्र साधन टार्च लाइट थी जो हम साथ लेकर जाते थे।' इवान ने कहा, 'हम आश्चर्यचकित थे कि बच्चे इतनी प्रतिकूल परिस्थिति में भी शांत थे। उन्होंने थोड़े समय के लिए भी अपना धैर्य नहीं छोड़ा। मैं अब भी समझ नहीं पा रहा हूं वह ऐसा कैसे कर पाए? यह अविश्वसनीय है।'

 

 


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