रायपुर।

 राजधानी में फर्जी हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। जरूरत पड़ने पर जब स्मार्ट कार्ड को युवक ने संजीवनी कोष के काउंटर में जमा किया तब उसके फर्जी होने का पता चला। महावीरनगर, गुलाब वाटिका के मकान नंबर चार में रहने वाले नरेंद्र सिंह चीमा (43) की शिकायत पर महिला और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। दोनों आरोपी आरएसबीवाए द्वारा स्मार्ट कार्ड बनाने वाली बंगलुरू की वाई फ्लैक्स प्रालि ठेका कंपनी के कर्मचारी हैं। पांच सितम्बर को कंपनी का ठेका खत्म होने के बाद भी ये पैसे लेकर फर्जी तरीके से कार्ड बना रहे थे। इनके कब्जे से 19 फर्जी स्मार्ट कार्ड, मशीन, स्केनर, लैपटॉप, अंगूठा लगाने वाली मशीन, ढेरों ब्लैंक स्मार्ट कार्ड, मोबाइल आदि जब्त किए गए। 

 

डीएसपी क्राइम अभिषेक माहेश्वरी ने बताया कि नरेंद्र सिंह की शिकायत के अनुसार 6 सितम्बर 2018 को परिचित प्रमिला जैन के माध्यम से डेंटल कालेज के पास रहने वाले मूलत: झारखंड के बोकारो जिले के ग्राम पेपरवास निवासी पंकज कुमार साव (27) पिता उमाशंकर और कांपा, नाहरपारा की श्रीमती गुरुप्रीत कौर उर्फ रुचि (27) पति अमरजीत सिंह से उसकी मुलाकात हुई थी। दोनों ने बताया कि वे हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाते हैं। चूंकि नरेंद्र सिंह का स्मार्ट कार्ड नहीं बना था इसलिए उसने अपने परिवार का स्मार्ट कार्ड बनवाने की इच्छा जताई। पंकज साव ने 1400 रुपये प्रति कार्ड बनाकर देने को कहा। नरेंद्र ने अपनी पत्नी मंजीत कौर चीमा, साला इंद्रजीत सिंह, सास

  

सुरेंद्र कौर तथा मित्र शंकर अग्रवाल और राजू यादव का स्मार्ट कार्ड बनाने के लिए 7 हजार रुपये पंकज को दिए। दो दिन बाद 8 सितम्बर को पंकज ने पांचों का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाकर दे दिया। दफ्तर में बुलवाकर महिला को कराया गिरफ्तार नरेंद्र सिंह मंगलवार को वह हेल्थ स्मार्ट कार्ड लेकर संजीवनी कोष गया था। वहां 25 नंबर खिड़की में स्मार्ट कार्ड से संबंधित जानकारी मांगने पर उसने कार्ड को दिया तो बताया गया कि यह नकली है। इसी बीच गुरुप्रीत कौर का नरेंद्र के मोबाइल पर कॉल आया। उसने कहा कि और किसी का स्मार्ट कार्ड बनवाना है तो दे सकते हैं। इस पर नरेंद्र ने उसे रंगे हाथ पकड़ने के लिए पने तेलीबांधा गली नंबर एक स्थित जय माता दी फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में बुलाया और पुलिस को भी खबर कर दी। गुरुप्रीत के वहां पहुंचते ही पहले से मौजूद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार में ले लिया।

 

कई शहरों से जुड़े फर्जीवाड़े के तार 

जांच में खुलासा हुआ कि मंजीत कौर और पंकज ने ठेका कंपनी का काम समाप्त होने का फायदा उठाते हुए घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर उनके नाम पर फर्जी हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाए। दूसरे के नाम से हैं। आरोपियों के कब्जे से जब्त लैपटॉप, मशीन, कैमरा आदि से कई लोगों के फर्जी स्मार्ट कार्ड, फोटो सेव मिले हैं। पुलिस का कहना है कि कुटरचित दस्तावेज तैयार कर लोगों के नाम पर फर्जी स्मार्ट कार्ड बनाकर लाखों रुपये ठगने वाले इस गिरोह के तार अन्य कई शहरों से जुड़े निकले हैं।