Farmer Protests: कुछ किसान नेताओं पर उठने लगे गंभीर सवाल, आंदोलन को नक्सली संगठन कर रहे हैं हाईजैक

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यह पूछा जाने लगा है कि आखिर ऐसे संगठन किसानों के बीच क्या कर रहे हैं जो शरजील इमाम और उमर खालिद समेत एलगार परिषद के आरोपियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। इनमें से कुछ के खिलाफ पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कृषि कानूनों को निरस्त करने की जिद पर अड़े संगठनों की ओर से जिस तरह किसानों के हित से परे दूसरे मुद्दे भी जोड़े जा रहे हैं उसने न सिर्फ किसान संगठनों के अंदर बल्कि बाहर भी सवाल पैदा कर दिए हैं। यह पूछा जाने लगा है कि आखिर ऐसे संगठन किसानों के बीच क्या कर रहे हैं जो शरजील इमाम और उमर खालिद समेत भीमा कोरेगांव घटना में शामिल एलगार परिषद के आरोपियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। इनमें से कुछ के खिलाफ पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है। सवाल यह उठता है कि कहीं किसानों की अगुवाई कर रहे कुछ संगठनों की पृष्ठभूमि नक्सलवाद से तो नहीं जु़ड़ी है। 

वाम विचारधारा से प्रेरित नेताओं और युवाओं को जेल से रिहा किए जाने की मांग

पंजाब भाजपा के महासचिव सुभाष शर्मा ने जहां सीधे तौर आरोप लगाया कि किसान की आड़ में कुछ नक्सली संगठन सक्रिय है। वहीं बताया जा रहा है कि किसान संगठनों के बीच भी ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। आंदोलन में शामिल कुल 31 संगठनों में कुछ संगठनों को वास्तविक रूप से किसानों का प्रतिनिधि माना जा रहा है। बताते हैं कि ये दल समाधान चाहते हैं, लेकिन बीकेयू हावी है। जबकि सच्चाई यह है कि बीकेयू (मान) 2019 चुनाव से पहले ऐसी ही मांगें करता रहा था। कृषि कानून से उनकी मांगें पूरी हुईं। लेकिन माहौल बदलते देख उसने भी सुर बदल लिया। बीकेयू उग्राहां सबसे ज्यादा उग्र है। इसी की ओर से गुरुवार को भारत के खिलाफ नारे लगाने वाले व अलग अलग धाराओं में बंद और वाम विचारधारा से प्रेरित नेताओं और युवाओं को जेल से रिहा किए जाने की मांग की थी। राजेवाल संगठन भी इसे लेकर असहज है। 

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