इंदिरा गांधी की विरासत से राष्ट्रवाद पर मुखर होगी कांग्रेस, पूर्व पीएम की भूमिका को दूर-दराज तक पहुंचाएगी पार्टी

Total Views : 96
Zoom In Zoom Out Read Later Print

कांग्रेस 2014 के चुनाव से पहले ही राष्ट्रवाद पर भाजपा के आक्रामक विमर्श में पिछड़ने लगी थी और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 2019 के चुनाव से ठीक पहले हुए बालाकोट एयरस्ट्राइक के उपरांत यह सियासी बहस लगभग एकतरफा हो गया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रवाद के राजनीतिक विमर्श में भाजपा के एकाधिकार को चुनौती देने की जरूरत कांग्रेस में शिद्दत से महसूस की जा रही है। विशेषकर देश के युवा वर्ग को पार्टी की वैचारिक धारा से जोड़ने के लिए यह ज्यादा जरूरी माना जा रहा है। कांग्रेस इसके मद्देनजर ही 1971 के युद्ध में भारत की जीत के साथ पाकिस्तान को दो टुकड़े कर बांग्लादेश के निर्माण का स्वर्ण जयंती वर्ष जोर-शोर से मनाएगी। इसके तहत बांग्लादेश युद्ध की तस्वीरें, वीडियो और देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अहम फैसलों व भाषणों से जुड़ी सामग्रियों को पार्टी देश के दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाएगी।

1971 के युद्ध में विजय इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल ही नहीं, स्वतंत्रता के बाद भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी सामरिक और कूटनीतिक जीत मानी जाती है। राजनीतिक विरोधी भी पाकिस्तान को दो टुकड़े करने वाले इस जंग में भारत की जीत का श्रेय इंदिरा गांधी के मजबूत नेतृत्व को देते रहे हैं। तभी कांग्रेस राष्ट्रवाद की प्रतिस्पर्धा में आने के लिए इंदिरा गांधी की विरासत से युवा पीढ़ी को जोड़ना चाहती है। 1971 के युद्ध की विजयगाथा का जश्न मनाने के लिए पार्टी जंग से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को दूर-दराज तक पहुंचाने के अलावा जिला स्तर पर देशभर में सम्मेलन और संगोष्ठियों का आयोजन भी करेगी

See More

Latest Photos