स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन में मोदी:प्रधानमंत्री ने यंग टैलेंट से कहा- नई शिक्षा नीति सच्चे अर्थ में पूरे भारत के सपने को अपने में समेटे हुए है, इसमें हर क्षेत्र-राज्य के विद्वान शामिल

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पीएम मोदी ने कहा- देश के युवाओं पर मुझे काफी गर्व है। आरोग्य सेतु के तौर पर युवाओं ने देश में कोविड की ट्रैकिंग के लिए एक बेहतर तकनीक दी है। मोदी बोले- यह केवल पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं है, यह 130 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों का रिफ्लेक्शन है उन्होंने कहा- आज भी बच्चों को लगता है कि उन्हें ऐसे विषय के आधार पर जज कर लिया जाता है, जो उनकी रुचि का नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन के ग्रांड फिनाले को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि नई शिक्षा नीति सच्चे अर्थ में पूरे भारत के सपने को अपने में समेटे हुए। इसमें हर क्षेत्र और राज्य के विद्वानों को शामिल किया गया है। यह केवल पॉलिसी डॉक्यूमेंट नहीं है। यह 130 करोड़ भारतीय की उम्मीदों का रिफ्लेक्शन भी है।

मोदी बोले कि आज भी अनेक बच्चों को लगता है कि उन्हें एक ऐसे विषय के आधार पर जज किया जाता है, जिनमें उनका इंटरेस्ट ही नहीं है। उन्हें मां बाप और समाज के चुने गए विषय को लेकर पढ़ना होता है। इसका असर उसकी पूरी जिंदगी के जर्नी पर पड़ता है। नई शिक्षा नीति में इसे बदलने का काम किया जा रहा है। पहले की कमियों को बदलने की कोशिश हो रही है। शिक्षा के इंटेंट और कंटेंट दोनों को ट्रांसफार्म करने का प्रयास है। यह लर्निंग, रिसर्च और इनोवेशन पर फोकस करता है।

मोदी के संबोधन की मुख्य बातें

  • यह हैकेथॉन पहली बार किसी समस्या को सुलझाने के लिए नहीं हो रहा, न ही यह अंतिम बार है। आप लर्निंग, क्वैश्चनिंग और डूइंग जारी रखें। जब आप सीखेंगे तो आप सवाल करेंगे। जब आप सवाल करेंगे तो कुछ करेंगे और उससे कुछ नई चीजें सामने आएगी। सीखना एक ऐसा वरदान है जो जीवन भर काम देता है। सिर्फ याद कर लेने से ज्यादा दिनों तक ज्ञान काम नहीं आता।
  • सिर्फ एक विषय के आधार पर यह तय नहीं हो सकता कि आपका प्रदर्शन क्या है। आप कौन हैं। आर्यभट्ट, लियो नार्डो विंची और गुरु रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इस बात को साबित किया है। अगर कोई चाहता है तो वह संगीत और गणित एक साथ पढ़ सकता है। वह एक साथ कोडिंग और आर्ट दोनों पढ़ सकता है। हमारी नई शिक्षा नीति में इंटर डिसीप्लीनरी एजूकेशन को महत्व दिया गया है।
  • इसके तहत एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का फायदा बच्चों को मिलेगा। इसका उनके पढ़ाई के अंत में कैलकुलेशन किया जाएगा। नेशनल एजूकेशन पॉलिसी प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा को असरकारी बनाने के लिए लाई गई है।
  • हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, हमारे देश के महान शिक्षाविद् डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर कहते थे कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो सभी के लिए सुलभ है। यह नीति उनको समर्पित है। यह हमारे नजरिए में बदलाव लाने की कोशिश है। हमारा फोकस एक ऐसे आत्मनिर्भर युवा का निर्माण करना है जो यह फैसला ले सके कि उसे जॉब करनी है और आंत्रप्रेन्योर बनना है।
  • हमारी भारतीय भाषाओं में कितनी रचनाएं हैं। कितना ज्ञान है। इन सबका और विस्तार होगा। नई नीति में स्थानीय भाषा को सीखने का अवसर मिलने पर इन भाषाओं का तो विस्तार होगा ही बच्चों का भी टैलेंट बढ़ेगा। अगर हम दुनिया के प्रमुख देशों को देखें तो वे अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं। वे दुनिया के साथ संवाद के लिए दूसरी भाषाओं को भी उतना ही महत्व देते हैं। 21वीं सदी में सफलता के लिए यह नीति और रणनीति है।
  • इसमें लोकल पर जितना फोकस है उतना ही उसे इंटरनेशनल के साथ इंटिग्रेट करने पर भी ध्यान दिया गया है। हम भारत में ही टॉप फॉरेन इंस्टीट्यूशन को भी भारत में कैंपस बनाने का मौका दिया जाएगा। इससे देश में स्थानीय भाषा के साथ ही ग्लोबल एजूकेशन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगा।
  • देश के युवाओं पर मुझे काफी गर्व है। आरोग्य सेतु के तौर पर युवाओं ने देश में कोविड की ट्रैकिंग के लिए एक बेहतर तकनीक दी है। उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में कई नए इन्नोवेशन किए हैं। इसकी आज पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।
  • मेरा मानना है कि ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका हमारे देश के युवा समाधान न ढूंढ सकें। हैकेथॉन की मदद से कई ऐसी समस्याओं को सुलझाया गया है। मुझे उम्मीद है कि इस हैकेथॉन की बाद भी आप ऐसी ही कोशिश जारी रखेंगे। ​​​​​​

स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन क्या है?
देशभर के स्टूडेंट्स को डेली लाइफ में आने वाली दिक्कतों को सॉल्व करने का प्लेटफॉर्म देने के लिए एक इनीशिएटिव है। इसमें प्रोडक्ट इनोवेशन का कल्चर और प्रॉब्लम सॉल्विंग की सोच के साथ काम करना होता है। सरकार का कहना है कि इस हैकेथॉन के जरिए कुछ नया करने के आइडिया को युवाओं के बीच प्रमोट करने में कामयाबी मिली है।

स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन का पहला एडिशन 2017 में हुआ था। उसमें 42 हजार स्टूडेंट्स ने पार्टिसिपेट किया था। 2018 में ये संख्या 1 लाख और 2019 में 2 लाख पहुंच गई। इस साल पहले राउंड में 4.5 लाख से भी ज्यादा स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस बार ग्रांड फिनाले ऑनलाइन हो रहा है। इसमें 10 हजार से ज्यादा छात्रों के बीच 243 समस्याओं को सुलझाने के लिए कंपीटीशन है। ये समस्याएं 37 केंद्रीय विभागों, 17 राज्य सरकारों और 20 इंडस्ट्रीज से जुड़ी हैं।

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