बैंक में एफडी के जरिए लोग सेविंग करते हैं, इसमें सेविंग के दौरान टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन मैच्योरिटी के वक्त मिलने वाला ब्याज पर टीडीएस कटता है। टीडीएस वित्त वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक में 10,000 रुपये से अधिक पर लागू होता है। अगर किसी वित्त वर्ष में कुल ब्याज 10,000 रुपये से अधिक हो जाता है तो उसमें से 10 फीसद का टीडीएस कटता है।

अगर किसी की कुल वार्षिक आय टैक्स देने की सीमा से कम है तो बैंक में फॉर्म 15जी या फॉर्म 15एच जमा करके टीडीएस कटौती से बचा जा सकता हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आयकर विभाग को पता चलता है कि जानबूझकर टीडीएस को टैक्स बचत के लिए टाला जा रहा है तो उस पर आयकर विभाग जुर्माना लगा सकता है।



फॉर्म 15जी और फॉर्म 15 एच के बारे में जानिए:-

 

1) फॉर्म 15जी और 15एच एक ऐसा फॉर्म है जो यह बताता है कि आप टैक्स देने की सीमा के नीचे हैं, जिससे इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

2) फॉर्म 15जी 60 साल से कम उम्र के भारतीय नगारिकों, हिंदू अविभाजित परिवार और ट्रस्टों के लिए है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के भारतीयों को फॉर्म 15एच जमा करने की आवश्यकता है। अगर किसी व्यक्ति की आयु 60 वर्ष से अधिक है और ब्याज से इनकम 50 हजार रुपये से अधिक नहीं है तो उन्हें फॉर्म 15एच जमा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बैंक टीडीएस नहीं काटेंगे। 

3) इन फॉर्म को बैंक, पोस्ट ऑफिस या अन्य संबंधित संगठनों में जमा करने से टीडीएस से बचा जा सकता है चाहे इनकम बैंक एफडी या पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट या रेंटल इनकम पर मिलने वाला ब्याज से हुई हो।

4) इन फॉर्म को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में जमा करना होगा, क्योंकि ये फॉर्म सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए ही मान्य होते हैं। 

5) ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आपकी ब्याज से इनकम पर अतिरिक्त टीडीएस काट लिया जाता है तो इसे सिर्फ उस वित्त वर्ष के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करके वापस पाया जा सकता है।