गौपूजन, गेड़ी, छत्तीसगढ़ी व्यंजन और पौधरोपण के साथ सादगीपूर्ण ढंग से मनाया गया पहला लोकपर्व

नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्योहारों की श्रृंखला की शुरुआत माने जाने वाले हरेली पर्व की धूम बुधवार को उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास में देखने को मिली। उप मुख्यमंत्री ने सपरिवार पूजा-अर्चना, गौपूजन और पारंपरिक गेड़ी पर चढ़कर इस लोकपर्व की गरिमा को जीवंत किया।

हरेली पर्व पर श्री साव ने विधिवत हल और कृषि औजारों की पूजा की, गौ माता को आटे की लोंदी और गुड़ खिलाया, और परंपरा के अनुरूप शीशम का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर उन्होंने कहा:

“हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो खेती-किसानी, प्रकृति और परंपराओं से गहरे जुड़ा है। यह पर्व मुझे बचपन की सुखद स्मृतियों से जोड़ता है।”


🌿 छत्तीसगढ़ी संस्कृति का उत्सव बना उपमुख्यमंत्री का निवास

पूरे परिसर को छत्तीसगढ़ी पारंपरिक परिवेश में सजाया गया था। लोक जीवन, रीति-रिवाज और खानपान की झलक हर ओर दिख रही थी।
इस अवसर पर उपस्थित मेहमानों और जनप्रतिनिधियों का स्वागत पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसे चौसेला, गुलगुल भजिया, बरा, टमाटर की चटनी और भजिया से किया गया।


👨‍🌾 अनेक जनप्रतिनिधियों ने दी उपस्थिति

हरेली पर्व पर कई मंत्रीगण, विधायक और समाजसेवी उप मुख्यमंत्री के निवास पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से –


🌾 हरेली: खेती और प्रकृति का पर्व

श्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व किसानों और कृषि कार्यों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है। बच्चों में गेड़ी की परंपरा उत्साह और आनंद का माध्यम बनती है।

उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से हमें प्रकृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश लेना चाहिए।


🌳 पौधरोपण का संदेश

श्री साव ने हरेली के दिन अपने निवास में शीशम का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हर त्योहार को हरियाली और स्वच्छता के संकल्प के साथ मनाएं।


उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के निवास पर मनाया गया हरेली पर्व, एक ओर जहां छत्तीसगढ़ी अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना, वहीं यह आयोजन आम जन से जुड़ाव और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना का भी प्रतीक रहा।