बारूदी बॉलर: जसप्रीत बुमराह की प्रेरणादायक कहानी

भारत के क्रिकेट इतिहास में जब भी घातक गेंदबाज़ों की बात होगी, जसप्रीत बुमराह का नाम सबसे अलग और खास अंदाज़ में लिया जाएगा। उनकी गेंदबाज़ी में रफ्तार, सटीकता और अप्रत्याशित उछाल का ऐसा संगम है कि दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज़ भी उनके सामने असहज दिखते हैं। शुरुआती संघर्ष बुमराह का जन्म 6 दिसंबर 1993 को अहमदाबाद में हुआ। जब वह छोटे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। उनकी माँ ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया। आर्थिक और भावनात्मक संघर्षों के बावजूद बुमराह ने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। अनोखा एक्शन, अलग पहचान बुमराह की गेंदबाज़ी का एक्शन पारंपरिक नहीं है। उनका छोटा रन-अप और तेज़, अजीब-सा रिलीज़ पॉइंट बल्लेबाज़ों के लिए गेंद को पढ़ना बेहद मुश्किल बना देता है। यही वजह है कि शुरुआत में कई लोगों ने उनके एक्शन पर सवाल उठाए, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। आईपीएल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक बुमराह ने अपने करियर की शुरुआत इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस के साथ की। वहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा और जल्द ही भारतीय टीम में जगह बना ली। उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ों को अपनी सटीक यॉर्कर और तेज़ गेंदों से परेशान करना शुरू किया। “डेथ ओवर” का मास्टर क्रिकेट में “डेथ ओवर” सबसे कठिन माने जाते हैं, लेकिन बुमराह इस कला के उस्ताद हैं। उनकी यॉर्कर इतनी सटीक होती है कि बल्लेबाज़ अक्सर सिर्फ बचाव ही कर पाते हैं। इसी कारण उन्हें “बारूदी बॉलर” कहा जाता है। उपलब्धियाँ और रिकॉर्ड चुनौतियाँ और वापसी चोटों ने भी बुमराह के करियर में रुकावटें डालीं, लेकिन हर बार उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी मानसिक मजबूती और अनुशासन उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है। प्रेरणा का स्रोत आज बुमराह सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्होंने यह साबित किया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है। निष्कर्ष:जसप्रीत बुमराह की कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनकी “बारूदी” गेंदबाज़ी ने दुनिया को यह दिखा दिया कि असली ताकत मेहनत और जुनून में होती है।

नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026: छत्तीसगढ़ बनेगा जनजातीय खेल प्रतिभा का राष्ट्रीय मंच

के तहत छत्तीसगढ़ एक बार फिर राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे इस भव्य आयोजन में देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 3000 जनजातीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन न केवल खेल प्रतिस्पर्धा है, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, कौशल और खेल संस्कृति का उत्सव भी है। राजधानी Raipur इस आयोजन का मुख्य केंद्र रहेगा, जहां हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, तीरंदाजी और वेट-लिफ्टिंग जैसे पांच प्रमुख खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसके साथ ही Jagdalpur में एथलेटिक्स और Ambikapur में कुश्ती की स्पर्धाएं होंगी। इस तरह पूरा आयोजन तीन प्रमुख शहरों में विभाजित होकर राज्यव्यापी खेल उत्सव का रूप ले रहा है। छत्तीसगढ़ की ओर से कुल 164 खिलाड़ी इसमें भाग ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरुष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य में बढ़ती खेल भागीदारी और महिला खिलाड़ियों की सशक्त उपस्थिति को दर्शाता है। खेल स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। Pandit Ravishankar Shukla University का फुटबॉल मैदान और ओपन ग्राउंड, Swami Vivekananda Athletics Stadium Kota, Sardar Vallabhbhai Patel International Hockey Stadium तथा अंतरराष्ट्रीय स्वीमिंग पूल जैसे प्रमुख स्थल इस आयोजन की भव्यता को बढ़ाएंगे। वहीं जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में भी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार आयोजन में पारंपरिक खेलों को भी विशेष स्थान दिया गया है। Kabaddi और Mallakhamb को डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है, जिससे जनजातीय और भारतीय पारंपरिक खेलों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। कुल मिलाकर, यह आयोजन खेल, संस्कृति और जनजातीय अस्मिता का संगम बनकर उभर रहा है, जो छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल आयोजनों के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मां दुर्गा से प्रार्थना है कि सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार हो।

चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम दिवस पर माँ काली के चरणों में शीश नवाकर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना करता हूँ। माँ का आशीर्वाद हम सभी के जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे तथा हर घर में खुशहाली, शांति और उन्नति का प्रकाश फैलाए।”

धान खरीदी में बड़ी कार्रवाई, कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी, 14 राइस मिल सील

मुंगेली में बड़ी कार्रवाई: 12 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त, 14 राइस मिल सील रायपुर/मुंगेली, 15 जनवरी 2026।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुंगेली जिले में कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने विभिन्न राइस मिलों पर छापामार कार्रवाई करते हुए 12 हजार क्विंटल से अधिक धान जब्त किया है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय आईसीसीसी (Integrated Command and Control Center) से मिले अलर्ट और मुख्य सचिव विकासशील के निर्देशों के अनुपालन में की गई। अभियान में पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय भी शामिल रहे। कहां-कहां मिली गड़बड़ी जांच के दौरान ओवरलोडिंग, धान की रिसायक्लिंग और कस्टम मिलिंग में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।निम्न मिलों में कार्रवाई की गई: इन संस्थानों से 12,000 क्विंटल से अधिक धान जब्त किया गया। इसके अलावा: जिला खाद्य अधिकारी हुलेश डड़सेना के अनुसार, 19 राइस मिलों पर कार्रवाई की जा रही है, जिनमें से 14 को सील कर दिया गया है। हाईटेक निगरानी: आईसीसीसी की भूमिका राज्य सरकार द्वारा स्थापित आईसीसीसी के माध्यम से धान खरीदी, भंडारण और परिवहन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रात्रिकालीन गश्त और सघन जांच अभियान भी चलाया जा रहा है। निष्कर्ष यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रणाली में बिचौलियों, कोचियों और मिलर्स की अनियमितताओं पर अब सख्ती से लगाम कसी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

जनदर्शन में कलेक्टर ने सुनी आमजन की समस्याएं

में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर ने बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जनदर्शन में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से आए लोगों ने भूमि विवाद, राजस्व प्रकरण, पेंशन, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क एवं पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कलेक्टर ने प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए विभागवार अधिकारियों को समयसीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आमजन की समस्याओं का शीघ्र समाधान प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जिससे लोगों में संतोष और प्रशासन के प्रति विश्वास देखने को मिला। कलेक्टर ने अधिकारियों को नियमित रूप से जनदर्शन आयोजित करने और प्राप्त आवेदनों की सतत मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए। जनदर्शन में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।

स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी, डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल

: स्व-सहायता समूह से बदली जिंदगी, डेयरी और खेती से ‘लखपति दीदी’ बनीं माधुरी जंघेल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां एक साधारण ग्रामीण महिला माधुरी जंघेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार का भविष्य बदल दिया। कभी सीमित आय और आर्थिक चुनौतियों से जूझने वाली माधुरी आज डेयरी और आधुनिक खेती के जरिए “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। माधुरी जंघेल ने गांव में संचालित स्व-सहायता समूह से जुड़कर सबसे पहले छोटी बचत की शुरुआत की। समूह के माध्यम से उन्हें बैंक से आसान ऋण मिला, जिससे उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने गायों की संख्या बढ़ाई और दूध उत्पादन को स्थानीय बाजार से जोड़ दिया। इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि होने लगी। इसके साथ ही माधुरी ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाया। सब्जी उत्पादन, जैविक खेती और फसल विविधीकरण के जरिए उन्होंने सालभर आय का स्थायी स्रोत तैयार किया। उनकी मेहनत और समझदारी ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया। आज माधुरी जंघेल न केवल खुद सशक्त हुई हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। वे स्व-सहायता समूह की बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को स्वरोजगार और बचत के महत्व के बारे में जागरूक करती हैं। सरकारी योजनाओं और समूह की सामूहिक शक्ति का सही उपयोग कर उन्होंने यह साबित किया है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक सफलता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। माधुरी जंघेल की यह सफलता कहानी “लखपति दीदी” अभियान को मजबूत करती है और दिखाती है कि छोटे प्रयास और दृढ़ संकल्प बड़े बदलाव ला सकते हैं।

अम्बेडकर अस्पताल में 11 साल के बच्चे के दिल से चिपका दुर्लभ कैंसर निकाला, बना विश्व कीर्तिमान

चिकित्सा क्षेत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है, जहाँ डॉक्टरों की टीम ने 11 साल के एक बच्चे के दिल से चिपका अत्यंत दुर्लभ कैंसर सफलतापूर्वक निकालकर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि एक संभावित विश्व कीर्तिमान भी स्थापित किया है। यह जटिल सर्जरी कई घंटों तक चली, जिसमें हृदय के बेहद संवेदनशील हिस्से से ट्यूमर को बिना किसी बड़े नुकसान के अलग करना सबसे बड़ी चुनौती थी। डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रकार का कैंसर दिल से इस स्तर पर चिपका होना अत्यंत दुर्लभ होता है और विश्व में ऐसे मामले बहुत कम दर्ज हैं। ऑपरेशन के दौरान उच्च स्तरीय तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया गया, जिससे बच्चे की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के चिकित्सा जगत के लिए गर्व का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में जटिल हृदय-ट्यूमर सर्जरी के लिए नई दिशा और उम्मीद प्रदान करेगी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर : स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री श्री साय रायपुर। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग, तपस्या और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में जीवन जी रहे हैं, वह हमारे वीर सेनानियों के संघर्ष और समर्पण का परिणाम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनगिनत वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनके साहस, त्याग और देशभक्ति की भावना से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों को आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान और उनके योगदान को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आने वाली पीढ़ियों को उनके इतिहास और संघर्ष से अवगत कराना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि देशभक्ति की भावना सदैव जीवित रहे।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा परिसर में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का किया शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही एक सशक्त राज्य की नींव होते हैं, इसलिए सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न रोगों की जांच, परामर्श और निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की गई है, जिससे जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और इस प्रकार के शिविरों का अधिकतम लाभ उठाएं, ताकि समाज में स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जागरूकता विकसित हो सके।

प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने लघु वनोपजों से उत्पाद बनाने की प्रक्रिया देखी

रायपुर: रायपुर में प्रशिक्षु आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारियों ने आज लघु वनोपजों (Minor Forest Produce) से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान अधिकारियों ने वन क्षेत्रों से संग्रहित महुआ, तेंदूपत्ता, साल बीज, चार, हर्रा-बहेड़ा जैसे वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की बारीकियों को समझा। प्रशिक्षुओं को बताया गया कि लघु वनोपज न केवल वनवासियों और ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है, बल्कि सही तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। अधिकारियों ने प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण करते हुए आधुनिक मशीनों और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय को भी देखा। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत वन समितियों और स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। प्रशिक्षु अधिकारियों ने स्थानीय समूहों से संवाद कर उनके अनुभव भी साझा किए और लघु वनोपज आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भावी वन अधिकारियों को जमीनी हकीकत से परिचित कराना तथा वन आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।