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मध्यप्रदेश में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने मेट्रो आधारित विकास मॉडल का खाका तैयार किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस महत्वाकांक्षी योजना का ब्लूप्रिंट पेश करते हुए कहा कि मेट्रो रूट के आसपास ‘ग्रोथ सेंटर’ विकसित किए जाएंगे, जिससे रोजगार, निवेश और आधुनिक शहरी सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा।
क्या हैं ‘ग्रोथ सेंटर’?
मंत्री के अनुसार, मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर चिन्हित क्षेत्रों में:
- औद्योगिक व व्यावसायिक हब
- स्टार्टअप व आईटी पार्क
- आवासीय कॉलोनियां और सामाजिक अवसंरचना
- शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन सुविधाएं
विकसित की जाएंगी। इससे परिवहन-सुविधा के साथ-साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को मजबूती मिलेगी।
किन शहरों पर रहेगा फोकस?
शुरुआती चरण में मध्यप्रदेश के प्रमुख मेट्रो प्रोजेक्ट्स—इंदौर और भोपाल—पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आगे चलकर अन्य उभरते शहरों में भी इस मॉडल को लागू करने की योजना है।
निवेश और रोजगार की उम्मीद
सरकार का दावा है कि इस रोडमैप से:
- निजी निवेश आकर्षित होगा
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे
- शहरी फैलाव योजनाबद्ध होगा और ट्रैफिक दबाव कम होगा
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह योजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि समग्र शहरी विकास का मॉडल है, जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
