खैरागढ़ जिले के करमतरा गांव में एक मामूली मकान विवाद ने सोमवार देर रात गंभीर रूप ले लिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आधी रात सैकड़ों ग्रामीण जालबांधा चौकी तक पहुंच गए और पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस घटनाक्रम ने जिले की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

मामला भूपत साहू और तेजेश्वरी साहू के बीच लंबे समय से चले आ रहे मकान विवाद से जुड़ा है, जिसे समय रहते सुलझाया नहीं गया। ग्रामीणों का आरोप है कि भूपत साहू लगातार गांव में तनावपूर्ण माहौल बना रहा था, लेकिन पुलिस ने शुरुआती स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे विवाद और गहराता चला गया।

ग्रामीणों के अनुसार, विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत स्तर पर कई बार समझाइश भी की गई, लेकिन आरोपित पक्ष की ओर से लगातार धमकी और उकसावे की कार्रवाई जारी रही। बीती रात हालात उस समय बेकाबू हो गए जब खुलेआम नाम लेकर धारदार हथियारों से जान से मारने की धमकियां दी गईं। इससे गांव में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से चौकी का रुख किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने देर से कार्रवाई कर हालात को और बिगाड़ दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने जालबांधा चौकी परिसर में पुलिस विरोधी नारे लगाए, जो जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

शिकायत के बाद पुलिस ने भूपत दास उर्फ साहेब, दीपक साहू और उसके पुत्र सूर्यकांत साहू सहित तीन लोगों को हिरासत में लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 170 और 126 के तहत कार्रवाई की है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई काफी देर से और दबाव में की गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण गांव की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे और खेतों में काम करने वाले किसान भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

इस पूरे मामले पर चौकी प्रभारी बीरेंद्र चंद्राकर ने स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि समय रहते सख्ती बरती जाती, तो क्या हालात यहां तक पहुंचते? करमतरा गांव की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या खैरागढ़ जिला पुलिस हालात बिगड़ने के बाद ही सक्रिय होती है। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।।