


रायपुर: रायपुर में प्रशिक्षु आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारियों ने आज लघु वनोपजों (Minor Forest Produce) से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान अधिकारियों ने वन क्षेत्रों से संग्रहित महुआ, तेंदूपत्ता, साल बीज, चार, हर्रा-बहेड़ा जैसे वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की बारीकियों को समझा।
प्रशिक्षुओं को बताया गया कि लघु वनोपज न केवल वनवासियों और ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है, बल्कि सही तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। अधिकारियों ने प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण करते हुए आधुनिक मशीनों और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय को भी देखा।
इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत वन समितियों और स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। प्रशिक्षु अधिकारियों ने स्थानीय समूहों से संवाद कर उनके अनुभव भी साझा किए और लघु वनोपज आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य भावी वन अधिकारियों को जमीनी हकीकत से परिचित कराना तथा वन आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।
