छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से बिजली बिल लेट पेमेंट पर नया नियम लागू होगा, जिसमें कंज्यूमर्स से पूरे महीने की बजाय केवल देरी के दिनों के हिसाब से सरचार्ज लिया जाएगा, जिससे लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी. इस नए रूल में क्या-क्या बदलाव हो रहा है और सरचार्ज कैसे देना है. इसके अलावा नई व्यवस्था में क्या नया अपडेट है और इससे पहले क्या नियम था, आइए जान लेते हैं इससे जुड़ी सारी डिटेल.
छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली कंज्यूमर्स के लिए अच्छी खबर है. अब बिजली बिल समय पर जमा न होने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं देना होगा. 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू होने जा रही है, जिसके तहत कंज्यूमर्स से केवल उतने ही दिनों का सरचार्ज लिया जाएगा, जितने दिन की देरी से उन्होंने बिल का भुगतान किया होगा. इस नए नियम का सबसे अधिक फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिनका बिजली बिल किसी कारण एक या दो दिन की देरी से जमा हो जाता है. पहले ऐसे कंज्यूमर्स को भी पूरे महीने का लेट पेमेंट चार्ज देना पड़ता था, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था.
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की नई दरों के साथ यह व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इसका मकसद कंज्यूमर्स को राहत देना और लेट पेमेंट चार्ज को अधिक न्यायसंगत बनाना है.

पहले क्या था नियम?
अब तक अगर कोई कंज्यूमर्स बिजली बिल की अंतिम तारीख के बाद सिर्फ एक दिन की भी देरी से भुगतान करता था, तो उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था. यानी देरी चाहे एक दिन की हो या 20 दिन की, सरचार्ज पूरे महीने के हिसाब से ही देना पड़ता था.
छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली कंज्यूमर्स के लिए अच्छी खबर है. अब बिजली बिल समय पर जमा न होने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं देना होगा. 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू होने जा रही है, जिसके तहत कंज्यूमर्स से केवल उतने ही दिनों का सरचार्ज लिया जाएगा, जितने दिन की देरी से उन्होंने बिल का भुगतान किया होगा. इस नए नियम का सबसे अधिक फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिनका बिजली बिल किसी कारण एक या दो दिन की देरी से जमा हो जाता है. पहले ऐसे कंज्यूमर्स को भी पूरे महीने का लेट पेमेंट चार्ज देना पड़ता था, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था.
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की नई दरों के साथ यह व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इसका मकसद कंज्यूमर्स को राहत देना और लेट पेमेंट चार्ज को अधिक न्यायसंगत बनाना है.

