एथिनिक ज़ोहर टूरिस्ट रिसॉर्ट, सरोदा दादर
छत्तीसगढ़ का सरोधा–दादर अब केवल एक गाँव नहीं, बल्कि पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरा है। प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि से भरपूर यह स्थल अब पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल जी के राज्य निर्माण में योगदान
रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल जी के राज्य निर्माण में योगदान को स्मरण करने 31 अक्टूबर, दोपहर 2.00 बजे विचार गोष्ठी शुक्ल भवन, बूढ़ापारा में सम्पन्न हुई. पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल ने उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल की देन है. बस्तर पहले आंध्रप्रदेश में समाहित किया जा रहा था जिसे पं. रविशंकर शुक्ल के विरोध के कारण मध्यप्रदेश में ही रहने दिया गया. अगर बस्तर मध्य प्रदेश से अलग हो जाता तो छत्तीसगढ़ नहीं बन पाता. शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल ने प्रबुद्ध जनों की मांग पर छत्तीसगढ़ संघर्ष मोर्चा का गठन किया. रायपुर, दुर्ग, महासमुंद आदि जिलों में जेल भरो आंदोलन, छत्तीसगढ़ महाबंद, एवं विशेष ट्रेन बुक कर दिल्ली में 10 हजार से ज्यादा आंदोलनकारियों ने संसद घेराव किया जहां आंदोलनकारियों पर लाठी चार्ज, पानी बौछार एवं अश्रु गैस की गोली चलाई गई. इसमें सैकड़ों आंदोलनकारी घायल हुए. सभी ने अपनी गिरफ्तारी भी दी. वर्तमान भाजपा सरकार राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाने जा रही है परन्तु पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के अग्रणी नेता शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल एवं आंदोलनकारियों को विस्मृत कर रही है जो उचित नहीं है. परिषद के महामंत्री रामअवतार देवांगन ने भी संघर्ष मोर्चा के गठन एवं आंदोलनों पर अपने अनुभवों को साझा किया. गोष्ठी में सभी ने अपने अनुभवों को साझा किया.विचार गोष्ठी में प्रमुख रुप से पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल, महामंत्री रामअवतार देवांगन, प्रवक्ता नितिन कुमार झा, चन्द्रशेखर शुक्ला, सलाम रिजवी, बीरेश शुक्ला, डॉ. उदयभान सिंह चौहान, कोरमा राव भिलाई, अधिवक्ताद्वय मनोज ठाकुर, संजय मिश्रा अभनपुर, आभा मरकाम, शिरीष अवस्थी, विकास गुप्ता, चौलेश्वर चन्द्राकर, अनुभवचरण शुक्ल, गंगा यादव, पुष्पेंद्र परिहार, रवि शर्मा, राहुल शुक्ला आदि उपस्थित थे.गोष्ठी में यह तय हुआ कि 1 नवम्बर को प्रात: 10 बजे श्री विद्याचरण शुक्ल उद्यान में विद्या भैया की प्रतिमा में पुष्पांजलि अर्पित की जायेगी एवं 21 जनवरी 2026 को वृहद प्रादेशिक कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जायेगा.कार्यक्रम का संचालन चौलेश्वर चन्द्राकार एवं आभार प्रदर्शन अनुभवचरण शुक्ल ने किया. उक्त जानकारी प्रवक्ता नितिन कुमार झा ने दी.
अमृतधारा जलप्रपात में लापरवाही पर कार्रवाई: युवकों को चेतावनी देकर छोड़ा गया, प्रशासन ने जारी की सख्त चेतावनी

मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़):छत्तीसगढ़ के मनोहर जलप्रपातों में से एक अमृतधारा जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परंतु प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आने वाले कुछ पर्यटक लापरवाही से बाज नहीं आ रहे, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। हाल ही में, नागपुर तहसीलदार समीर शर्मा के नेतृत्व में अमृतधारा जलप्रपात पर कार्रवाई की गई। मनेंद्रगढ़ निवासी कृष गुप्ता (उम्र 19 वर्ष) और मोहम्मद अरशद (उम्र 20 वर्ष) को जलप्रपात के नीचे, तेज जलधारा के बेहद करीब नहाते हुए पाया गया। दोनों युवकों की यह गतिविधि सुरक्षा मानकों के विरुद्ध पाई गई। तत्पश्चात दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर नागपुर थाना लाया गया। परिजनों के निवेदन और समझाइश के बाद युवकों को चेतावनी देकर रिहा किया गया। यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले के अन्य प्रमुख जलप्रपातों – रमदहा और कर्म घोंघा – में भी पहले लापरवाही के कारण कई दुर्घटनाएं घट चुकी हैं। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग अब सख्ती के मूड में हैं। प्रशासन की चेतावनी: लापरवाही पड़ी तो जाना होगा जेल जिला प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जलप्रपात क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की लापरवाही – जैसे तेज बहाव वाले क्षेत्र में नहाना, पत्थरों पर चढ़कर सेल्फी लेना या चेतावनी बोर्ड की अनदेखी – करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे लोगों को जेल भेजने से भी परहेज नहीं किया जाएगा। पर्यटकों से अपील: प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें, पर सतर्क रहें प्रशासन ने सभी स्थानीय और बाहरी पर्यटकों से अपील की है कि वे प्राकृतिक स्थलों का आनंद उठाएं, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन करें। जलप्रपात के पास अनावश्यक जोखिम उठाना न सिर्फ उनकी जान को खतरे में डालता है, बल्कि दूसरों को भी संकट में डाल सकता है।
