
राजनांदगांव शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम से मनगटा क्षेत्र में लगभग 54 एकड़ शासकीय भूमि पर हुए कथित कब्जे और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव जिले के कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव द्वारा की गई कार्यवाही जिले में भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि वर्षों से जिले में भू-माफियाओं और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता रहा है।
ओस्तवाल ने कहा कि मनगटा क्षेत्र में बिना डायवर्सन और शासन के नियमों के विरुद्ध बड़े रिसोर्ट, मैरिज लॉन तथा अन्य निर्माण कार्य किए गए। इतने बड़े स्तर पर अवैध कब्जा और निर्माण बिना विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों तथा संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभागों द्वारा पूर्व में जारी सभी नोटिसों और कार्यालयीन मूल नस्तियों की जांच कराई जाए तथा इस पूरे मामले में संलिप्त भू-माफियाओं, कॉलोनाइजरों और वर्तमान कब्जाधारियों की विस्तृत जांच कराई जाए।
उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि मामले की जांच ईडी एवं सतर्कता विभाग से कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर शासकीय दस्तावेजों में कूटरचना जैसे मामलों में भी कार्रवाई की जाए। ओस्तवाल ने कहा कि वर्षों तक संबंधित विभागीय अधिकारी “कंबल ओढ़कर घी पीते” रहे और करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर कब्जा होता रहा।
उन्होंने कहा कि कलेक्टर जितेन्द्र यादव द्वारा अभी केवल “ट्रेलर” दिखाया गया है और आगे निगम क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों, अवैध प्लॉटिंग और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ओस्तवाल ने इस कार्रवाई को राजनांदगांव जिले के गठन के बाद लगभग 50 वर्षों में हुई सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई बताया।

