
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत को बकाया राशि दिए जाने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान का वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केपी सरकार का कोई बकाया नहीं है और राष्ट्रीय वित्त आयोग (एनएफसी) की नवीनतम किश्त के रूप में 46.5 अरब पाकिस्तानी रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, संघीय सरकार प्रांतों को उनका एनएफसी हिस्सा पखवाड़े के आधार पर नियमित रूप से जारी करती है और इस मामले में कोई लंबित भुगतान नहीं है। यह बयान केपी के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी द्वारा कथित बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग के एक दिन बाद सामने आया है।
मंत्रालय ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में केपी को कुल 7.8 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये हस्तांतरित किए गए हैं, जिसमें एनएफसी हिस्से से 1.4 ट्रिलियन रुपये से अधिक की राशि शामिल है। यह जानकारी द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में दी गई है।
क्या है विवाद
केपी सरकार का दावा है कि 2018 में पूर्व संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों (FATA) के विलय के बाद प्रांत की जनसंख्या में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार पर 850 अरब से 1.3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक का बकाया बनता है।
सरकार की सफाई
वित्त मंत्रालय ने कहा कि 7वें एनएफसी पुरस्कार के तहत केपी को विभाज्य पूल का 14.62 प्रतिशत हिस्सा और आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में प्रांत की भूमिका को मान्यता देते हुए अविभाजित पूल से अतिरिक्त 1 प्रतिशत दिया गया था। नए एनएफसी पुरस्कार पर आम सहमति न बनने के कारण अब भी 7वें एनएफसी फार्मूले को ही लागू किया जा रहा है।
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने एनएफसी हस्तांतरण के अतिरिक्त केपी को 1.4 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये से अधिक की संघीय सहायता दी है, जो कुल हस्तांतरण का लगभग 18 प्रतिशत है। FATA के विलय के बाद नवगठित जिलों के विकास के लिए 2019 से अब तक 704 अरब पाकिस्तानी रुपये भी जारी किए जा चुके हैं।
