
Shiromani Akali Dal में में लुधियाना और आसपास के इलाकों में लंबे समय से गुटबाजी की चर्चा बनी हुई है। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के समर्थक धड़े सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
लुधियाना पश्चिम उपचुनाव से पहले कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़कर Indian National Congress में शामिल होना भी इसी अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में मुकेरियां से सरबजोत सिंह साबी, सरपंच अनिल ठाकुर और सुनाम से राजिंदर दीपा के कांग्रेस में जाने से अकाली दल को राजनीतिक झटका लगा।
पार्टी अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal लगातार बैठकों और रैलियों के जरिए संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई नेताओं की नाराजगी और टिकट की राजनीति को लेकर असंतोष सामने आता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरण, Aam Aadmi Party और कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता, तथा स्थानीय नेतृत्व संघर्ष के कारण अकाली दल को लुधियाना क्षेत्र में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। और आसपास के इलाकों में लंबे समय से गुटबाजी की चर्चा बनी हुई है। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के समर्थक धड़े सक्रिय हैं, जिससे संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
लुधियाना पश्चिम उपचुनाव से पहले कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़कर Indian National Congress में शामिल होना भी इसी अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में मुकेरियां से सरबजोत सिंह साबी, सरपंच अनिल ठाकुर और सुनाम से राजिंदर दीपा के कांग्रेस में जाने से अकाली दल को राजनीतिक झटका लगा।
पार्टी अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal लगातार बैठकों और रैलियों के जरिए संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई नेताओं की नाराजगी और टिकट की राजनीति को लेकर असंतोष सामने आता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरण, Aam Aadmi Party और कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता, तथा स्थानीय नेतृत्व संघर्ष के कारण अकाली दल को लुधियाना क्षेत्र में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

