
धमतरी/कुरूद। छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई नई बिजली दरों को लेकर कुरूद के पूर्व विधायक एवं पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक लेखराम साहू ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता को अब बिजली दरों में वृद्धि के रूप में “440 वोल्ट का झटका” दिया गया है। सरकार जनहित की बात तो करती है, लेकिन उसके फैसले आम लोगों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ा रहे हैं।
लेखराम साहू ने कहा कि राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी नए टैरिफ के तहत घरेलू, व्यावसायिक और कृषि श्रेणी के अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली महंगी कर दी गई है। नई व्यवस्था में विभिन्न श्रेणियों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही अग्रिम बिजली बिल भुगतान पर मिलने वाली छूट में कटौती तथा विलंब शुल्क के नए नियम भी लागू कर दिए गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि नए टैरिफ के अनुसार 0 से 100 यूनिट तक बिजली की दर 4.10 रुपये से बढ़ाकर 4.40 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है। वहीं 101 से 200 यूनिट तक 4.50 रुपये, 200 से 400 यूनिट तक 6 रुपये, 400 से 600 यूनिट तक 7 रुपये तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की नई दरें लागू होंगी। इसके अलावा व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी की गई है, जबकि कृषि पंपों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि किसानों की लागत बढ़ाएगी।
साहू ने कहा कि बिजली दरों में यह वृद्धि केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर बाजार, छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और कृषि क्षेत्र पर भी पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर दिखाई देगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार हर मोर्चे पर जनता को निराश कर रही है। किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे, स्कूली बच्चों को किताबों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, पेंशनधारक अपनी पेंशन के लिए परेशान हैं और अब बिजली दरों में बढ़ोतरी कर सरकार ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याण के बजाय लोगों को “टेंशन पर टेंशन” देने का काम कर रही है।
लेखराम साहू ने कहा कि सरकार एक ओर ‘सुशासन तिहार’ के नाम पर बड़े-बड़े शिविर लगाकर अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनता के सामने लगातार नई समस्याएं खड़ी कर रही है। यदि सरकार वास्तव में सुशासन देना चाहती है तो उसे सबसे पहले महंगाई पर नियंत्रण करना चाहिए, बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी वापस लेनी चाहिए और किसानों, व्यापारियों तथा आम उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल शिविर आयोजित कर समस्याओं के समाधान का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता को वास्तविक राहत देने वाले निर्णय लेने होंगे।

