8 जुलाई को सभी 90 विधानसभाओं में विधायकों से लिखित सहमति मांगेगी आम आदमी पार्टी

8 जुलाई को सभी 90 विधानसभाओं में विधायकों से लिखित सहमति मांगेगी आम आदमी पार्टी

छत्तीसगढ़ रायपुर

नकटी गांव बुलडोज़र कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी अभियान, गरीबों की जमीन पर विधायक निवास बनाने का किया विरोध

रायपुर। आम आदमी पार्टी (आप) छत्तीसगढ़ ने रायपुर जिले के नकटी गांव में हुई बुलडोज़र कार्रवाई के विरोध में 8 जुलाई को प्रदेश की सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में राज्यव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल प्रत्येक विधानसभा में संबंधित विधायक से मुलाकात कर उनसे लिखित सहमति-पत्र लेने का प्रयास करेंगे कि वे गरीबों की जमीन और उजड़े हुए आशियानों पर बनने वाले प्रस्तावित विधायक निवास को स्वीकार नहीं करेंगे।

पार्टी का आरोप है कि यदि गरीब परिवारों के घर उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए आवास बनाए जाते हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को अधिकारों की रक्षा के लिए चुनती है, न कि उनके घर उजाड़कर अपने लिए भवन बनवाने के लिए।

पार्टी ने सभी विधायकों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मानवता के आधार पर निर्णय लेने और सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने की अपील की है कि वे ऐसे किसी विधायक निवास को स्वीकार नहीं करेंगे, जो गरीब परिवारों के विस्थापन की कीमत पर बनाया जा रहा हो।

आम आदमी पार्टी के अनुसार, यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि न्याय, संवेदना और संविधान के मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। प्रत्येक विधानसभा में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से विधायक को सहमति-पत्र और ज्ञापन सौंपकर उनसे लिखित जवाब मांगा जाएगा।

पार्टी ने प्रदेश के सभी पदाधिकारियों, जिला एवं विधानसभा प्रभारियों, ब्लॉक अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। साथ ही कार्यक्रम के फोटो, वीडियो और संक्षिप्त प्रतिवेदन उसी दिन राज्य कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पार्टी का कहना है कि यह केवल नकटी गांव का मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन सभी गरीब परिवारों का सवाल है जिन्हें भविष्य में विकास या अन्य योजनाओं के नाम पर विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास, न्याय और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखने की बात कही है।

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