
छत्तीसगढ़ में होली के त्योहार से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार द्वारा नई आबकारी नीति में ड्राई डे (Dry Day) की संख्या कम करने और होली के दिन शराब दुकानें खुली रखने के संभावित फैसले पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने इसे सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, तो वहीं सत्ताधारी भाजपा ने कांग्रेस के कार्यकाल के ‘शराब घोटाले’ की याद दिलाते हुए पलटवार किया है।
कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि होली के समय सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं होती हैं। “होली एक पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है, लेकिन भाजपा सरकार सिर्फ राजस्व और पैसा कमाने के चक्कर में इस दिन भी दुकानें खुली रख रही है। यह प्रदेश के माहौल को खराब करने और युवाओं को नशे में झोंकने की कोशिश है।”
कांग्रेस नेता के बयान पर पलटवार करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि, समय के अनुसार फैसले होते हैं। इसके अलावा, आबकारी नीति में 7 दिन की जगह केवल 3 दिन ड्राई डे रखे जाने के फैसले पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा, सरकार नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास के संदेश ‘खानी, बानी और सयानी’ का हवाला देते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि हर कोई नशे से दूर रहे, लेकिन प्रशासनिक निर्णय समय की मांग के अनुसार लिए जाते हैं।
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस के आरोपों को जनता को डराने की कोशिश करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि, “यह छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है कि कांग्रेसी दिन-रात नए-नए प्रोपेगेंडा रच रहे हैं। जिन्होंने 3200 करोड़ का शराब भ्रष्टाचार किया, वे हमें बुद्धि न दें। साय सरकार जनता के हित में काम कर रही है और हमें भगवान श्रीराम ने पर्याप्त बुद्धि दी है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
छत्तीसगढ़ की नई आबकारी नीति के तहत ड्राई डे की संख्या में कटौती की गई है। कांग्रेस का तर्क है कि त्योहारों पर शराब की उपलब्धता बढ़ने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, जबकि सरकार का फोकस अवैध शराब की बिक्री रोकने और नियंत्रित राजस्व पर है।

