भगवान का ध्यान करने से अपने अंदर के विकार दूर हो जाते है – नरेंद्र नयन शास्त्री

छत्तीसगढ़ राजनांदगांव

श्रीकृष्ण – सुदामा के अटूट मैत्री के गुणगान  से भाव विह्वल हुए श्रद्धालु  ,,छलक पड़े आंखों से आंसू

राजनांदगांव /  लेवर कालोनी दशहरा मैदान में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथावाचक आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री को सुनने लोगों की भीड़ रही। महराज जी के अच्छे ज्योतिषी होने के कारण सुबह  उनका दर्शन करने तथा अपने भविष्य जानने के लिए लोगों की भीड़ रही। वहीं दोपहर के समय कथा श्रवण के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े रहे। महराज नरेंद्र नयन शास्त्री जी ने अपने अंतिम दिन की कथा में लोगों को कहा कि संत,महात्मा,साधु पुरुषों का दर्शन  मोक्ष का द्वार खोलने वाला है। उनका  सत्संग लाभ लेनी चाहिए,ज्ञान की बात सुननी चाहिए। संत का हृदय नवनीत के सामान होता है। उन्होने बताया कि संत, गुरु, महात्मा जितने जल्दी क्रोधित होते हैं उतने जल्दी शांत भी हो जाते हैं। जल्द ही क्रोधित होने वाले दुर्वासा ऋषि एक बार भगवान श्री कृष्ण से मिलने गए।‌ उनके आवभगत में रुक्मिणी से देरी गई। इससे वे क्रोधित हो गए। इससे रुक्मिणी ऋषि के चरणों में गिर गई। शांत हुए ऋषि ने उसे प्रायश्चित करने 11 महिने तक जल पीकर रहने व भगवान श्री कृष्ण से अलग रहने के लिए कहा। शास्त्री जी ने कहा कि ऐसा भगवान श्री कृष्ण जी चाहते थे। भगवान 25 वर्ष के थे और रुक्मिणी 16 वर्ष की थी। इसलिए ब्रह्मचर्य साधना के लिए इसका सहारा लिया गया। महराज जी ने भगवान श्री राम के सबसे  बड़ा ब्रह्मचारी बताया और कहा कि एक पत्नीव्रत रहकर  सर्वांग सुंदरी बन कर आई सूर्पनखा की ओर उन्होंने एक नजर भी नहीं डाली। भगवान श्री कृष्ण  जी का विवाह चाहे जामवंती से हो या सत्यभामा या कालिंदी सबके पीछे एक कारण जुड़ा रहा।
श्री कृष्ण – सुदामा के मैत्री दृश्य पर आंसू छलक पड़े
नगर निगम नेता प्रति संतोष पिल्ले द्वारा अपने पूर्वजों की स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के लिए समाजसेवी श्रीमती शारदा तिवारी, पूर्णिमा साहू, क्रांति मौर्य आदि के अलावा पेटी ग्रूप के झम्मन देवांगन, मिश्रा जी ,राजेश, थामस , जयनारायण,आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु को संबोधित करते हुए कथावाचक शास्त्री जी ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा के अटूट दोस्ती का भाव पूर्ण वर्णन किया और  कथास्थल में दिखाई गई भगवान श्री कृष्ण द्वारा दरिद्र सुदामा के चरण धोने के दृश्य लोगों को भाव विभोर कर दिया जिससे लोगों के आंखों में आसूं आ गए। कथावाचक ने भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार 108 रानियां बताते हुए 8 पटरानियों में रुक्मिणी,जामवंती कालिंदी, सत्यभामा,लक्ष्मणा आदि का नाम लिया और कहा कि ये 8 प्रकृति है जो ईश्वर है। मुख्य रानी रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न को उन्होंने कामदेव का अवतार बताया। महराज जी ने कहा कि संत महात्माओं के सान्निध्य से धर- परिवार में खुशियां आती है। मोक्ष के द्वार खुलते है। श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथास्थल में यज्ञ – हवन का आयोजन किया गया जिसमें पिल्ले परिवार के अलावा बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी श्रद्धालु जनो की उपस्थिति रही जिनके द्वारा स्वाहा ध्वनि के साथ आहूति प्रदान की गई। उक्ताशय की जानकारी संतोष पिल्ले द्वारा दी गई।

Share this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *