हकीकत यही है कि इस बजट में देश में अमीरों और गरीबों के बीच बढ़ चुकी आर्थिक असमानता पर कोई चिंता नहीं व्यक्त की गई है और न ही एससी, एसटी, ओबीसी, कमजोर आर्थिक वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है। मोदी सरकार हर साल नए तरह के सपने बजट में दिखाती है और पिछले सपनों को भूल जाती है। जैसे अब मेक इन इंडिया पर कोई बात नहीं होती। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में कितना घोटाला हुआ, यह हाल ही में आई रिपोर्ट्स से पता चलता है। महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार के बजट में न महिलाओं के लिए कोई बड़ी पहल है, न इस बात की चिंता कि रोजगार में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए। बजट में रुपये की गिरती कीमत, महंगाई, या टैरिफ के कारण हो रहे व्यापार घाटे की भी कोई चिंता नहीं है।।

